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नबी की यहुदी जोजा (पत्नि) सफिया बिन्त हुएई “को ईमान में लाया गया”

April 29, 2017

नबी की यहुदी जोजा (पत्नि)
सफिया बिन्त हुएई “को ईमान में लाया गया”
मदीने से ७०मील दुर यहुदी किले खैेबरपर इस्लाम के लश्कर ने नबी के नेतृत्व में अल सुबह, अचानक हमला कर दिया । लोगउस समय सुबह के देनन्दिन कार्य व जानवरों को पानी पिलाने​ चराने आदि मे व्यस्त थे ।
बुखारी बुक -१Vol-८ ह०-३१७
*नबी* :- *अल्लाह हूअकबर खैबर* *बरबादहो गया।*
जब हम खैबर में दाखिल हो रहे थे तो हमने यहुदीयों की सुबह बरबाद कर दी, क्योंकि उन्होंने इंकार (इस्लाम कबुल करने से मना) की नीतिअपनायी,
*यह नबी ने तीन बार दोहराया* खैबर के लोग चिल्लाए मो० पैगम्बर के लोग लुटमार व लड़ने आ गये है ।
जंग के बाद माल ए गनीमत का बंटवारा होने लगा:
*दिहया बिन कल्बी* – या ! रसुल मुझे एक लोंडी अता फरमा ।
*नबी* – जो तुझे पसंद हो ले ले
वह सफिया बिन्त हुयेय को ले गया ।
वह बला की खूबसूरत थी,
ऐसे में मानव स्वभावनुसार अन्य मुजाहिदो को ईर्ष्या हुई, वे बोले या ! रसूल वह तो कबीले के सरदार, किनाना बिन अल रबी की जोजा थी, वह बला की खूबसूरत है।
वह तो आपके लायक है ,
नबी ने दिहया को वापस बुलाया, व कहा कि यह तो मुझे दे-दे और दुसरी ले ले,
उनमें एक यहुदी ने इस्लाम स्वीकारने के बाद नबी को बताया, कि सफिया के पति, किनाना bin अल रबी को, कबीले के कहीं गड़े खजाने की जानकारी है ।
नबी ने अल जुबेर bin अल अवाम को कहा, जब तक यह खजाना नहीं बताता इसे torture किया जाये, उसे गर्म सलाखों से दागा जाने लगा, लकड़ी के धधकते अंगारे उसकी छाती पर रखे गये ।
लेकिन असफल रहे, तो अंत में नबी के आदेश पर मोहम्मद बिन मसलमा ने सर कलम कर दिया ।
इधर उम्म सुलेमा ने सफिया को
नबी से निकाह के लिए तैयार किया, उसे सजाया संवारा गया।
वहीं लश्कर के टेंट में नबी ने सफिया के साथ रात निकाह किया ।
अल सुबह नबी
ने देखा कि अबु अय्यूब टेंट के बाहर
नंगी तलवार लिए घुम रहा है ।
*नबी*- क्या बात है क्यों घुम रहे हो
*अय्यूब* – मैं रात भर से आपके टेंट की निगरानी रख रहा हूं या ! रसूल उल्लाह, क्योंकि मुझे अभी भी सफिया के ईमान (मुस्लिम) लाने पर शक है,, क्योंकि अभी -२ उसने अपना पति, ससुर, भाई व अन्य रिश्तेदार कत्ल होते देखे हैं ।
(सफियाबनुकुरेजा कबीले की बैटी भी थी । कुछ समय पुर्व ही कबीले के तमाम पूरुषो जो ६००-९०० थे को सरेंडर करने के बाद pubic hair की जॉच के बाद, कत्ल कर दिया गया था तथामहिलाबच्चों को गुलाम )
वह *सदमे* में है संभव है आपसे बदला लेने का प्रयास करे ।
इसके अतिरिक्त कुरआन शरीफ की
आयत-२३४ सूरा -२ पारा-१ पैज -५९
के अनुसार विधवा हुई स्त्रीयो के लिए
पुनर्विवाह हेतु *इद्दत* का period
४ माह १० दिन रखा गया । उसकी भी
पालना नहीं हुई ।
अबू अय्यूब के कार्य व दूरद्रष्टि ने
नबी को बेहद प्रभावित किया, व उन्होंने कहा कि
या ! अल्लाह मेरे
अय्यूब का पुरा ख्याल रखना ।

Courtesy :- सीरत रसूलउल्लाह
(नबी की जीवनी)
द्वारा इब्न हिशाम
पैज ५१५

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